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Supreme Court की सख्ती के बाद ग्रेटर नोएडा के कार्यपालक मजिस्ट्रेट निलंबित, छात्र को 5 लाख के नोटिस का मामला

गौतमबुद्ध विश्वविद्यालय के छात्र अक्षत त्रिपाठी को प्रदर्शन में शामिल होने के मामले में 5 लाख रुपये के निजी मुचलके का नोटिस जारी करने वाले ग्रेटर नोएडा के तृतीय कार्यपालक मजिस्ट्रेट डॉ. रवि शंकर मिश्रा को सुप्रीम कोर्ट की नाराजगी के बाद तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया। सरकार की ओर से सॉलिसिटर ज

Kumar

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September 10, 2026
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Supreme Court की सख्ती के बाद ग्रेटर नोएडा के कार्यपालक मजिस्ट्रेट निलंबित, छात्र को 5 लाख के नोटिस का मामला
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सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद ग्रेटर नोएडा के कार्यपालक मजिस्ट्रेट निलंबित, छात्र को 5 लाख के नोटिस का मामलाग्रेटर नोएडा, 10 सितंबर 2026

गौतमबुद्ध विश्वविद्यालय के छात्र अक्षत त्रिपाठी को प्रदर्शन में शामिल होने के मामले में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) के तहत 5 लाख रुपये के निजी मुचलके का नोटिस जारी किए जाने के बाद प्रशासनिक स्तर पर बड़ी कार्रवाई हुई है। सुप्रीम कोर्ट में मामले की सुनवाई के दौरान कड़ी नाराजगी जताए जाने के बाद ग्रेटर नोएडा के तृतीय कार्यपालक मजिस्ट्रेट डॉ. रवि शंकर मिश्रा को तत्काल प्रभाव से निलंबित किए जाने की जानकारी अदालत को दी गई।

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट की पीठ को बताया कि संबंधित अधिकारी के खिलाफ प्रशासनिक कार्रवाई की जा चुकी है।

छात्र को जारी हुआ था 5 लाख रुपये का नोटिस

मामला गौतमबुद्ध विश्वविद्यालय के छात्र अक्षत त्रिपाठी से जुड़ा है। उन्हें 20 जुलाई को CJP के बैनर तले हुए प्रदर्शन में शामिल होने के संबंध में BNSS के प्रावधानों के तहत नोटिस जारी किया गया था।

नोटिस में छात्र से शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए 5 लाख रुपये का निजी बंधपत्र प्रस्तुत करने को कहा गया था। साथ ही निर्धारित प्रक्रिया के तहत जमानतदारों से संबंधित शर्तें भी रखी गई थीं।

पुलिस की ओर से आशंका जताई गई थी कि प्रदर्शन में छात्र की गतिविधियों से क्षेत्र में शांति व्यवस्था प्रभावित हो सकती है। वहीं छात्र की ओर से इन आरोपों को खारिज करते हुए प्रदर्शन को शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक बताया गया।

सुप्रीम कोर्ट ने कार्रवाई पर उठाए सवाल

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने इस बात पर गंभीर आपत्ति जताई कि अदालत की ओर से प्रदर्शन में शामिल छात्रों के खिलाफ दंडात्मक अथवा जबरन कार्रवाई पर रोक के बावजूद संबंधित अधिकारी की ओर से नोटिस जारी किया गया।

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने अधिकारियों को न्यायालय के आदेशों का पालन सुनिश्चित करने की कड़ी हिदायत दी। अदालत ने साफ किया कि कोई भी प्रशासनिक अधिकारी न्यायिक आदेशों से ऊपर नहीं हो सकता।

मामले में अदालत की सख्ती के बाद छात्र को जारी नोटिस वापस लिए जाने की कार्रवाई भी की गई।

अधिकारी पर प्रशासनिक कार्रवाई

सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से संबंधित कार्यपालक मजिस्ट्रेट के निलंबन की जानकारी दी गई। इसके बाद यह मामला प्रशासनिक स्तर पर भी चर्चा में आ गया है।

उपलब्ध जानकारी के अनुसार डॉ. रवि शंकर मिश्रा PPS कैडर के 2018 बैच के अधिकारी हैं। वह पुलिस कमिश्नरेट गौतमबुद्धनगर में ACP/तृतीय कार्यपालक मजिस्ट्रेट के पद पर तैनात थे।

न्यायिक आदेशों के पालन पर सुप्रीम कोर्ट का जोर

इस पूरे घटनाक्रम ने प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा न्यायालय के आदेशों के अनुपालन को लेकर महत्वपूर्ण सवाल खड़े किए हैं। सुप्रीम कोर्ट की नाराजगी और उसके बाद हुई निलंबन की कार्रवाई से यह संदेश भी गया है कि न्यायालय द्वारा दिए गए स्पष्ट निर्देशों के बावजूद यदि कोई प्रशासनिक कार्रवाई की जाती है तो संबंधित अधिकारी को जवाबदेही का सामना करना पड़ सकता है।

मामले में छात्र को जारी नोटिस, उसके बाद सुप्रीम कोर्ट की आपत्ति और संबंधित अधिकारी के निलंबन ने गौतमबुद्धनगर से जुड़े इस प्रकरण को महत्वपूर्ण बना दिया है।

रिपोर्ट: News 360°

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Kumar is an experienced journalist covering breaking news, local infrastructure, technology, and civic developments in Noida and Greater Noida.

Comments (2)

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Aditya Singh1h ago

This is a great analysis. The new digital infrastructure will definitely boost the local economy and create thousands of jobs in the tech sector.

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Neha Patel30m ago

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Vikram Reddy2h ago

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