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गौतमबुद्ध नगर में मजिस्ट्रेटीय शक्तियों पर DM का स्पष्टीकरण, कमिश्नरेट व्यवस्था की अधिसूचना सामने रखी

गौतमबुद्ध नगर में मजिस्ट्रेटीय शक्तियों को लेकर उठे सवालों के बीच डीएम मेधा रूपम के कार्यालय ने 13 जनवरी 2020 की शासन अधिसूचना के आधार पर स्थिति स्पष्ट की है। अधिसूचना में पुलिस आयुक्त और वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को निर्धारित कानूनों के तहत विभिन्न मजिस्ट्रेटीय शक्तियां दिए जाने का उल्लेख है।

Kumar

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September 10, 2026
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गौतमबुद्ध नगर में मजिस्ट्रेटीय शक्तियों पर DM का स्पष्टीकरण, कमिश्नरेट व्यवस्था की अधिसूचना सामने रखी
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गौतमबुद्ध नगर में मजिस्ट्रेटीय शक्तियों पर डीएम का स्पष्टीकरण, कमिश्नरेट व्यवस्था की अधिसूचना सामने रखी

गौतमबुद्ध नगर, 10 सितंबर 2026। गौतमबुद्ध नगर में पुलिस कमिश्नरेट व्यवस्था के तहत पुलिस अधिकारियों को मिली मजिस्ट्रेटीय शक्तियों को लेकर चल रही चर्चा के बीच जिलाधिकारी मेधा रूपम के कार्यालय ने स्थिति स्पष्ट की है। डीएम कार्यालय की ओर से जारी प्रेस नोट के साथ उत्तर प्रदेश शासन की 13 जनवरी 2020 की अधिसूचना भी सार्वजनिक की गई है। इसमें कमिश्नरेट व्यवस्था लागू होने के बाद पुलिस आयुक्त और अन्य वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को दी गई विभिन्न मजिस्ट्रेटीय शक्तियों का उल्लेख है।

यह स्पष्टीकरण ऐसे समय सामने आया है जब जिले से जुड़े एक मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट की टिप्पणियों के बाद जिलाधिकारी की भूमिका और पुलिस अधिकारियों के अधिकारों को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

कमिश्नरेट व्यवस्था में बदली प्रशासनिक व्यवस्था

डीएम कार्यालय के अनुसार, गौतमबुद्ध नगर में पुलिस कमिश्नरेट प्रणाली लागू होने के बाद कानून-व्यवस्था से जुड़े कई अधिकार पुलिस आयुक्त को सौंपे गए। इसके चलते पहले जिलाधिकारी के पास रहने वाली कुछ पारंपरिक मजिस्ट्रेटीय शक्तियों का स्वरूप बदला।

2020 में जारी शासन की अधिसूचना को इसी व्यवस्था का आधार बताया गया है। इसके तहत निर्धारित कानूनों के संबंध में पुलिस अधिकारियों को अलग-अलग स्तर की मजिस्ट्रेटीय शक्तियां प्रदान की गई थीं।

पुलिस आयुक्त को मिली थीं कई महत्वपूर्ण शक्तियां

अधिसूचना में तत्कालीन दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC), 1973 की धारा 20 का उल्लेख करते हुए पुलिस आयुक्त को अनुसूची में शामिल विभिन्न अधिनियमों के तहत कार्यपालक मजिस्ट्रेट, अपर जिला मजिस्ट्रेट और जिला मजिस्ट्रेट की शक्तियां दिए जाने की बात कही गई थी।

वहीं धारा 21 के तहत लखनऊ नगर और गौतमबुद्ध नगर में तैनात संयुक्त पुलिस आयुक्त, अपर पुलिस आयुक्त, उप पुलिस आयुक्त, अपर उप पुलिस आयुक्त और सहायक पुलिस आयुक्तों को निर्धारित मामलों में कार्यपालक मजिस्ट्रेट की शक्तियां प्रदान किए जाने का प्रावधान बताया गया है।

इस व्यवस्था के बाद पुलिस अधिकारियों की भूमिका केवल कानून-व्यवस्था और पुलिसिंग तक सीमित नहीं रही, बल्कि शासन द्वारा निर्धारित कुछ मामलों में उन्हें मजिस्ट्रेटीय अधिकार भी प्राप्त हुए।

कई महत्वपूर्ण कानून अधिसूचना में शामिल

13 जनवरी 2020 की अधिसूचना की अनुसूची में कई ऐसे कानूनों का उल्लेख है जिनके तहत निर्धारित अधिकारियों को शक्तियां प्रदान की गई थीं।

इनमें उत्तर प्रदेश गुण्डा नियंत्रण अधिनियम, 1970, विष अधिनियम, 1919, अनैतिक व्यापार (निवारण) अधिनियम, 1956, पुलिस (द्रोह-उद्दीपन) अधिनियम, 1922, पशुओं के प्रति क्रूरता निवारण अधिनियम, 1960 और विस्फोटक अधिनियम, 1884 शामिल हैं।

इसके अलावा कारागार अधिनियम, 1894, शासकीय गुप्त बात अधिनियम, 1923, विदेशियों विषयक अधिनियम, 1946, गैर-कानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम, 1967 और पुलिस अधिनियम, 1861 भी सूची में शामिल बताए गए हैं।

इसी क्रम में उत्तर प्रदेश अग्निशमन सेवा अधिनियम, 1944, उत्तर प्रदेश अग्नि निवारण एवं अग्नि सुरक्षा अधिनियम, 2005 तथा उत्तर प्रदेश गिरोहबंद एवं समाज विरोधी क्रियाकलाप (निवारण) अधिनियम, 1986 का भी उल्लेख है।

हर कार्रवाई के लिए डीएम के पास फाइल जाना जरूरी नहीं

डीएम कार्यालय के स्पष्टीकरण के अनुसार, कमिश्नरेट व्यवस्था में जिन पुलिस अधिकारियों को निर्धारित कार्यपालक मजिस्ट्रेटीय अधिकार दिए गए हैं, वे संबंधित मामलों में अपने स्तर पर उन शक्तियों का प्रयोग कर सकते हैं।

इसका अर्थ यह नहीं है कि प्रत्येक ऐसी कार्रवाई के लिए फाइल अनिवार्य रूप से जिलाधिकारी, अपर जिलाधिकारी या उप जिलाधिकारी के समक्ष भेजी जाए।

हालांकि, किसी विशेष मामले में किस अधिकारी के पास कौन-सा अधिकार था और कार्रवाई के समय कौन-सा वैधानिक प्रावधान लागू था, इसका निर्धारण संबंधित मामले के तथ्यों और उस समय लागू अधिसूचना के आधार पर ही किया जाएगा।

धारा 130 को लेकर भी स्थिति साफ

डीएम कार्यालय ने एक महत्वपूर्ण बिंदु पर भी स्थिति स्पष्ट की है। कार्यालय की ओर से कहा गया है कि गौतमबुद्ध नगर के जिलाधिकारी द्वारा धारा 130 के तहत कोई आदेश जारी नहीं किया गया है।

यह स्पष्टीकरण उस विवाद के संदर्भ में सामने आया है जिसमें संबंधित कार्रवाई को लेकर जिलाधिकारी की भूमिका पर सवाल उठाए जा रहे थे।

हाईकोर्ट की टिप्पणी के बाद बढ़ी चर्चा

इलाहाबाद हाईकोर्ट की टिप्पणी के बाद गौतमबुद्ध नगर में पुलिस कमिश्नरेट और जिलाधिकारी के बीच मजिस्ट्रेटीय अधिकारों के बंटवारे को लेकर चर्चा तेज हो गई है।

डीएम कार्यालय द्वारा वर्ष 2020 की शासन अधिसूचना सामने रखे जाने के बाद अब पूरे मामले में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि संबंधित घटना के समय कौन-सा अधिकारी किस वैधानिक शक्ति के तहत कार्रवाई करने के लिए अधिकृत था।

मामले की स्थिति को समझने के लिए हाईकोर्ट के आदेश, डीएम कार्यालय के स्पष्टीकरण और 13 जनवरी 2020 की शासन अधिसूचना को एक साथ देखना जरूरी होगा। इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर संबंधित कार्रवाई की वैधानिक जिम्मेदारी और कमिश्नरेट व्यवस्था में अधिकारियों के अधिकारों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

रिपोर्ट: News 360°

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Written by Kumar

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Kumar is an experienced journalist covering breaking news, local infrastructure, technology, and civic developments in Noida and Greater Noida.

Comments (2)

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Aditya Singh1h ago

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Neha Patel30m ago

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Vikram Reddy2h ago

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